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कैसे पायें गंजेपन से छुटकारा

गंजेपन को दूर करने के लिए तरह-तरह की दवाइयाँ और तेल बाजारों में बिकते हैं। गंजेपन का सरल, सस्ता व घरेलू उपाय है-आंवले का सेवन। आइये जानतें हैं गंजेपन को दूर करने के निम्न उपाय- 1-अनार के दानों,पत्तों और छिलकों को पीसकर लुगदी बना लें। फिर उस लुगदी को सरसों के तेल में मिलाकर हल्की आंच पर पकायें। जब सब चीजें पक जायें और तेल बच जाये। तो उसे छान कर शीशी में भरकर रख दें। इस तेल को नियमित दिन में दो-तीन बार लगायें। इससे गंजापन दूर हो सकता है। 2-पके व सूखे आंवले के चूर्ण को नारियल के तेल में मिलायें। आप चाहें तो उसमें चमेली का तेल भी डाल सकतें हैं। फिर उस तेल से सिर को रगड़-रगड़कर मालिश कीजिये। इस रस को फिर पानी में मिलाकर सिर को रगड़-रगड़कर धोइये और सूखे आंवले को सुपारी की तरह थोडा-थोडा करके खाते रहिये निश्चय ही गंजेपन की शिकायत धीरे-धीरे दूर हो जायेगी। 3-हरी धनिया को पीसकर उसका रस निकालें। उस रस से बालों में नियमित मालिश करें। इससे बाल मुलायम और काले होगें और बालों का झड़ना खत्म होगा और यहां तक कि गंजापन भी मिट जायेगा।

मुलहठी का उपयोग

मुलहठी मीठी तथा ठण्डी होती है। मुलहठी की जड़ पेसाब लाने वाली और दर्दनाशक भी होती है। यह खांसी में विशेष लाभकारी है। इससे कफ पिघलकर बाहर निकल जाती है। यह आमाशय की जलन को भी दू...

राई यानि काली सरसों का उपयोग

राई बहुत ही उपयोगी एवं पाचक है। दवा के रूप में इसके अनेक घरेलू उपयोग हैं। यह खुजली, कोढ़ और पेट के कीड़ों को नष्ट करने वाली होती है। काली राई में भी यही गन हैं। आइये जानतें हैं रा...

सिरके का उपयोग

गन्ने के रस से बनता है सिरका। सिरके को रूचिकर, पेट के रोगों में लाभप्रद, ह्रदय के लिए लाभकारी, अग्नि को प्रदीप्त करने वाला, सिरका पेट की वायु को नष्ट करने वाला है। इसकी उपयोगि...

धनिया का उपयोग

आप सभी तो जानतें ही हैं कि मसालों में धनिये का अपना अलग ही महत्व है। लेकिन यह बात बहुत कम गृहणियों को मालूम है कि धनिया औषधि के रूप में भी बहुत ही लाभकारी मानी जाती है। हरी तथा ...

उच्च रक्तचाप का इलाज

आजकल के परिवेश में बहुत सी बीमारियां अतिशीघ्रता से हमारे शरीर में अपना बसेरा बना लेतीं हैं। इन बीमारियों में से एक है उच्च रक्तचाप यानि हाई ब्लड प्रेसर। बढ़ते मानसिक तनाव ...

दमा अर्थात अस्थमा का इलाज

दमा भी एक जानलेवा बिमारी है। यह बीमारी सांस से सम्बंधित होती है। इस वजह से इसे सांस का रोग भी कहतें हैं अगर सांस की नली में कोई विकार पैदा हो जाये तो सांस लेने में परेशानी बढ़ जाती है और हमारी सांस फूलने लगती है। इसे दमा कहतें हैं। कारण-धूलभरे वातावरण में रहना, नम और शीत जलवायु, धुँआ लगना आदि श्वास रोग के प्रमुख कारण हैं। किसी बाहरी पदार्थ के सेवन से श्वसन संस्थान में एलर्जी हो जाने के कारण भी यह रोग हो जाता है। लक्षण-सांस तेज चलती है और इसके साथ ही घबराहट की आवाज भी आती है। इस रोग में जब भी खांसी आती है तो खांसी के साथ ही बलगम भी बाहर आता है।सांस लेने में तकलीफ होती है और विशेष रूप से सांस छोड़ने में ज्यादा तकलीफ होती है। नाड़ी की गति अत्याधिक बढ़ जाती है, सांस छोड़ने में या लेने में इतनी फूल जाती है कि हांफने की स्थिति उत्प्नन हो जाती है। इस रोग में निम्न नुश्खे लाभदायक हैं- नुश्खे-1-काली मिर्च के पत्तों को छोटी मधुमक्खियों के शहद के साथ सेवन करने से बहुत फायदा होता है। 13 मिली शहद में 20 मिली तुलसीदल का रस निकालकर मिलायें और इसका सेवन करें। निश्चितरूप से लाभ होगा। 2-दमे का दौरा पड़ने...

मधुमेह या डायबिटीज का इलाज

मधुमेह इन्सुलिन की कमी के कारण उत्प्नन शारीरिक क्रिया है। हमारे शरीर में पाचन संस्थान के कुछ नीचे बाई ओर एक पैंक्रियाज नामक ग्रंथि होती है। इसी ग्रंथि के कुछ विशेष कोष इं...

नपुंसकता का इलाज

संभोग की प्रबल इच्छा होने पर और प्रिय स्त्री के निकट होने के बावजूद भी लिंग में शिथिलता के कारण जो पुरूष इस क्रिया में नाकाम रहता है। उसे नपुंसकता कहा जाता है और उस पुरूष को ...

खसरा का इलाज

खसरा एक संक्रामक रोग होता है। यह ज्यादातर बच्चों पर हावी होता है। इस रोग में पहले बुखार आता है फिर दूसरे या तीसरे दिन इसमें दाने नजर आने लगता है और फफोलों का रूप ले लेते हैं औ...