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धनिया का उपयोग

आप सभी तो जानतें ही हैं कि मसालों में धनिये का अपना अलग ही महत्व है। लेकिन यह बात बहुत कम गृहणियों को मालूम है कि धनिया औषधि के रूप में भी बहुत ही लाभकारी मानी जाती है।
हरी तथा सूखी धनिया में बहुत सारे स्वास्थ्यवर्धक गुण छिपे हुये हैं। धनिया का उपयोग घरेलू औषधि के रूप में सहजता से किया जा सकता है।
इसके निम्न औषधीय उपयोग हैं-

1-सूजन व जलन- शरीर के किसी भी हिस्से में सूजन अथवा जलन होने पर धनिया को सिरके में बारीक पीसकर सूजे हुए हिस्से अथवा जलन वाले भाग पर लेप करने से लाभ मिलता है।

2- मलेरिया बुखार- यदि ठंडक के साथ बार-बार बुखार चढ़ता हो। तो सूखा धनिया और सोंठ समान मात्रा में लेकर 5-5 ग्राम दिन में चार बार लेने से मलेरिया का बुखार उतर जाता है।

3- अनिद्रा का रोग- हरी धनिया को पीसकर उसमें मिश्री तथा पानी मिलाकर लस्सी की तरह बनाकर दिन में तीन बार पीने से अनिद्रा रोग में लाभ होता है।

4- मूत्र रोग- पेसाब में जलन होने पर सूखा धनिया तथा आंवला समान मात्रा में लेकर रात को भिगों दें तथा सुबह महीन पीसकर शर्बत की तरह एक सप्ताह तक नियमित पीना लाभदायक होता है।

5-मुख की दुर्गन्ध- मुख से आने वाली दुर्गन्ध को सूखा धनिया चबाकर दूर किया जा सकता है।
प्याज तथा लहसुन की गंध भी धनिया चबाकर दूर की जाती है।

6-नेत्र रोग- हरी धनिया को पीसकर उसका रस निकालकर कपड़े से छान लें। फिर इसे घी में मिलाकर दो-दो बूँद आँखों में सुबह और शाम डालने से दुखती आँखों को लाभ मिलता है।
इससे आँखों की फुंसियां, फूली, पपड़ी आदि दूर होती हैं तथा ऐनक का नंबर भी उतर जाता है। आँखों के विकारों में हर धनिया बहुत लाभकारी है।

7-लू का लगना- धनिया को पानी में भिगोकर उसे मसलकर छान लें। उसमें थोड़ी-सी शक्कर मिलाकर पीने से गर्मियों में लगी हुयी लू मिटती है।

8- प्यास बार-बार लगने पर- सूखा धनिया पानी में भिगो दें और उसे मसल दें। फिर उसमें शहद और शक्कर मिलाकर पीने से बार-बार लगने वाली प्यास शांत होती है।

9- बच्चों की खांसी- हरी धनिया का रस और शक्कर को चावल के मांड में मिलाकर पिलाने से बच्चों की खाँसी और साँस रोग दूर हो जातें हैं।

10- बवासीर- हरी धनिया को पीसकर और उसे गर्म कर इसकी पुल्टिस बनाकर बवासीर के मस्सों पर सेंक करने से मस्से नरम पडतें हैं और इसके द्वारा होने वाला दर्द दूर हो जाता है।
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