किशोरियों को खाने पीने पर विशेष ध्यान देना चाहिए क्योकि यह वही समय है जबकि उनके शरीर का सम्पूर्ण विकास होता है। ऐसे समय में यदि खानपान में लापरवाही बरती गयी हो इसका दुष्प्रभाव सम्पूर्ण शरीर पर दिखाई देता है।
किशोरावस्था के दौरान उनके शरीर का विकास तेजी से होता है। इसके अलावा माहवारी के दौरान भी उनकी योनि से खून निकलता है। जिससे आयरन जैसे तत्व उनके शरीर से निकल जातें हैं।
खानपान की गलत आदतों के कारण या माता-पिता,अभिभावकों द्वारा भेदभाव की वजह से कई किशोरियों को एनीमिया हो जाती है। जिसकी वजह से किशोरियों में कमजोरी व चक्कर आने की समस्या अधिकतर खून की कमी के कारण होती है। अतः खून में आयरन के स्तर को बनाये रखने के लिए खाने पीने में पौष्टिक पदार्थों विशेषकर हरी पत्तेदार सब्जी, मौसमी फल, दालें, गुड़ आदि का प्रयोग अवश्य करना चाहिए।
इसके अतिरिक्त हर सप्ताह आयरन की गोली अपने नजदीकी आंगनबाड़ी, आशा, ए. एन. एम अथवा अस्पताल से लेनी चाहिए और उन्हें नियमित खाना चाहिए।
किशोरियों के माता-पिता तथा अन्य बड़े बुजुर्गों व अभिभावकों को भी इस काम में किशोरियों की मदद करनी चाहिए तथा उनमें और लड़कों में भेदभाव नहीं करना चाहिए।
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