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नीम का उपयोग neem ka upyog

नीम का पेड़ बड़े ही काम का व्रक्ष है। दूसरे शब्दों में अगर यह कहा जाये कि नीम हकीम का कार्य करता है। तो झूठ नहीं है। सिर से लेकर पैरों तक के रोगों का इलाज भी नीम ही करता है।
नीम निम्न रोगों में उपयोगी है-
1-चर्म रोग- नीम के पत्तों को उबालकर उबाले गये पानी से स्नान करने से चर्म रोगों में लाभ होता है। जिससे फोड़े-फुंसियां, इत्यादि चर्म रोग नष्ट हो जातें हैं।

2-स्वास्थ्यवर्धक- नीम के 6-7 कोमल पत्ते, तुलसी के 8-10 पत्ते और 6-7 काली मिर्च पीसकर उनका चूर्ण बना लें, इस चूर्ण को नियमित रूप से खाने से स्वास्थ्य लाभ होता है।

3- कील-मुहांसे- नीम जलाने के बाद बची हुयी राख को क्रीम अथवा वैसलीन में मिलाकर चेहरे पर लगाने से कील और मुहांसे दूर हो जातें हैं।

4-अजीर्ण-अजीर्ण अर्थात् भोजन न पचने से खट्टी डकारें, सिरदर्द, जी मचलना, और कभी-कभी बुखार की शिकायत हो जाती है। ऐसे में निम्बोली खाने से पेट के उपर्युक्त सभी विकार नष्ट हो जातें हैं।

5- उदर शूल- पेट में दर्द होने पर 10 ग्राम नीम के बीज, 10 ग्राम सोंठ, 10 ग्राम तुलसी की पत्तियां तथा 7 से 10 काली मिर्च मिलाकर गाढी चटनी जैसा बनाकर थोड़ी-थोड़ी देर में चटायें। इससे अवश्य फायदा होगा।

6-जीव-जंतुनाशक- घर में नीम के सूखे पत्तों का धुँआ करने से मच्छर, मक्खी और अन्य जीव-जंतुओं का नामोनिशान मिट जाता है।

7-गण्डमाला-नीम का तेल गण्डमाला की रामबाण औषधि है। गण्डमाला पुराने घाव, फोड़ों आदि पर नीम का तेल लगाने से जल्द आराम मिलता है।

8-आँखों में जलन-नीम की पत्तियों का रस निकालकर रूई के फाहे को भिगोकर आँखों पर रखें। आँखों की जलन और लालिमा दूर हो जायेगी।

9-दमा व खांसी- 10 बूँद नीम का तेल पान पर लगाकर खाने से दमा और खांसी में तुरंत लाभ मिलता है।

10-उल्टी- यदि किसी को उल्टी हो रही हो तो 25 ग्राम नीम की पत्तियों को पीस लें और इसमें 5 से 6 दाने काली मिर्च मिलाकर आधा कप पानी में घोलकर रक बार रोगी को पिला दें। उल्टी तुरंत रुक जायेगी।

11-प्रदर रोग - गाय के दूध में नीम का तेल मिलाकर पीने से प्रदर रोग में बहुत  फायदा होता है। नीम के बीज को पानी में भिगोकर व पीसकर तथा पोटली बनाकर योनि पर रखने से योनि का दर्द समाप्त हो जाता है।

12-आँखों में सूजन- यदि आँखों में सूजन व खुजली हो। तो 15 से 20 पत्तियों को पानी में उबालें। फिर उसमे 5 ग्राम फिटकरी घोलकर छानकर छान लें। साफ़ रूई द्वारा इस पानी से आँखे धोएं। दो-तीन बार ऐसा करने से सूजन और खुजली समाप्त हो जाती है।

13-पायरिया- पायरिया तथा मसूढ़ों के रक्त स्त्राव में नीम का तेल लाभप्रद होता है। नियमित मसूढ़ों पर इसकी मालिश करनी चाहिए।

14-जूं व लीखें- नीम का तेल प्रतिदिन सिर में लगाने से जूँ व लीखें खत्म हो जतिन हैं

15-दंत रोग-रोज सुबह नीम की दातून करने से दांत मजबूत और चमकदार बनतें हैं तथा पायरिया और दंतक्षय जैसे रोग नहीं होते हैं।

16-अम्लपित्त- शरीर में अम्लपित्त की वजह से कई विकार उत्प्नन जातें हैं। ऐसे में नीम की छाल, सोंठ और काली मिर्च बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनाएं। 20 ग्राम चूर्ण रोज सवेरे ताजे पानी के साथ लेने से अम्लपित्त की शिकायत दूर हो जाती हैं।

17-खसरा-खसरा होने पर नीम की कच्ची कोपलें तथा काली मिर्च बराबर मात्रा में पीसकर प्रतिदिन खायें तथा खसरा सूखने पर नीम के पानी से नहलायें तथा नीम का ही तेल लगायें।

18-नीम का शर्बत-गर्मी के दिनों में नीम का शर्बत पियें और पिलायें। इससे ठंडक मिलेगी और खून भी साफ़ होगा है।

19-नकसीर-नकसीर फूटती हो तो नीम की छाल को पानी में पीसकर गाढ़ा लेप बनायें। इस लेप को माथे पर लगाने से नकसीर से राहत मिलती है।

20-मलेरिया-मलेरिया में नीम के रस का गाढ़ा सर्वोत्तम दवा है। 50 ग्राम नीम के पत्ते को 4 से 5 काली मिर्च मिलाकर पियें। इसे गर्म पानी में मिलाकर पिलायें। मलेरिया ठीक हो जायेगा।

21-हाथ-पैरों में जलन-नीम की पत्तियों को पीसकर हाँथ और पैरों पर लेप करना चाहिए। इससे जलन शांत होती है।
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