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हल्दी का उपयोग

हल्दी से तो सभी लोग परिचित होगें ही आइये आज हम इसके उपयोगों के बारे में जानतें हैं। प्राचीनकाल से ही भोजन व घरेलू उपचार के रूप में हल्दी का प्रयोग होता आ रहा है। लेकिन दुःखद बात यह है कि एक महत्वपूर्ण औषधि होते हुये भी हल्दी के पूर्ण उपयोग के बारे में सभी लोग नहीं जानतें हैं। इसके सेवन से किसी भी प्रकार के नुकसान होने की सम्भावना भी नहीं होती है।
यह शरीर के रक्त को शुद्ध कर शरीर के वर्ण को भी निखरती है।
आइये इसके नुस्खों के बारे में जानतें हैं-
नुश्खे-1-चोट-मोच-चोट या मोच लग जाने पर हल्दी को फिटकरी के साथ पीसकर सरसों के तेल में गर्म करके उसका पेस्ट बना लें। उससे गर्म-गर्म ही उस चोट या मोच वाले स्थान पर सेंक करें और वहां पर पट्टी बांध दें। इससे दर्द में जल्द आराम मिलेगा।

2-घाव- हल्दी के साथ थोड़ी फिटकरी पीसकर घाव पर लगाने से घाव जल्द भरतें हैं। यदि चोट लगने के कारण खून बहने लगे तो इसे लगाने से खून का बहन रुक जाता है।

3-हब्बा-डब्बा रोग-गोमूत्र में चुटकी भर हल्दी डालकर बच्चों को पिलाने से उनका हब्बा-डब्बा रोग ठीक हो जाता है।

4-स्वरभेद-हल्दी और दूध को गर्म कर रात को पीने से स्वरभेद में लाभ होता है और दबी हुई आवाज खुलती है।

5-नेत्र रोग-हल्दी की गाँठ अरहर की दाल में पकाकर उसे छाया में सुखा लें। इसे पानी में घिसकर सूर्यास्त के पहले दिन में दो बार आँखों में लगाने से सफेद फूली और आँखों की लालिमा दूर होती है।

6-खांसी-हल्दी के टुकड़े को सेंक कर रात में सोते समय मुँह में रखने से जुकाम, कफ और खांसी में लाभ होता है। कष्टदायी खांसी भी हो तो भी वह भी इस नुश्खे से ठीक हो जाती है।

7-गलघंटी- ठंडे पानी में हल्दी की गांठ को घिसकर तथा मक्खन मिलाकर दिन में दो बार तीन दिन तक बच्चे के दोनों कन्धों पर गले के नीचे पीठ की हड्डी और दोनों कानों के आगे के हिस्सों में लगाने से बच्चों में गलघंटी रोग दूर हो जाता है।

8-बिच्छू का डंक-पिसी हुई हल्दी आग पर डालकर बिच्छू के डंक मारने वाले स्थान पर उसका धुँआ देंने से विष उतर जाता है।

9-स्तन में सूजन-हल्दी को ग्वारपाठे के गर्भ में पीसकर स्तन पर लेप करने से स्तन की सूजन दूर होती है।

10-नहरूआ- पुरूष में मूत्र में हल्दी पीसकर नहरूये पर लेप करने से नहरूआ दूर हो जाता है।

11-चेचक-चेचक रोग का उपद्रव हो रहा हो तो इमली के पत्ते और हल्दी को पीसकर तथा ठंडे पानी में घोलकर पीने से चेचक निकलने का डर नहीं होता है।

12-बवासीर-हल्दी की गाँठ को आग में भूनकर उसका चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को तीन ग्राम की मात्रा में ग्वारपाठे में मिलाकर सुबह-शाम सात दिन तक सेवन करने से बवासीर के मस्से में लाभ होता है। ग्वारपाठे के साथ हल्दी को पीसकर और थोडा सा नमक मिलाकर गर्म करके बवासीर के मस्सों पर लेप करने से व पुल्टिस बाँधने से भी मस्से नरम होतें हैं और राहत मिलती है।

13-मधुमेह-हल्दी को पीसकर घी में सेंककर तथा शक्कर में मिलाकर कुछ दिन रोज खाने से मधुमेह में लाभ मिलता है।

14-हाथीपाँव- गाय के मूत्र में हल्दी का चूर्ण तथा गुड़ मिलाकर सेवन करने से कुछ ही दिनों में हाथीपाँव का रोग दूर हो जाता है।

15-पीलिया-सौ मिली गाय के मठ्ठे या छाछ में 5 ग्राम हल्दी डालकर सुबह-शाम सेवन करने से एक ही सप्ताह में पीलिया दूर हो जाता है।
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