मुह के अंदर जीभ की जड़ के पास देखने पर ठीक दोनों ओर गांठे दिखाई दें। तो समझ लेना चाहिए की टॉन्सिल्स बढ़े हुए हैं।
दूषित जल पीने,शीत के कारण,शीतल पेय और बर्फ से बने पदार्थो के सेवन से यह रोग होता है।
लक्षण-पहली अवस्था में जब एक या दोनों ओर का टॉन्सिल फूल जाता है तथा सुपारी जितना बडा हो जाता है। कोई चीज खाते या निगलते समय तकलीफ होती है। दर्द कान तक फ़ैल जाता है,बुखार हो जाता है,धीरे-धीरे टॉन्सिल पक जाता है और अंत में फट जाता है। ऐसी हालत में मरीज को साँस लेने में भी तकलीफ होती है।
नुश्खे-1-कडवी तुम्बी के पके फल को लेकर उसके अंदर का गूदा निकल दें और उसमें जल भरकर सात दिन तक रहने दें। इस जल को पीने और पथ्य आहार का सेवन करने से टॉन्सिल की सूजन शीघ्र समाप्त हो जाती है।
2-जलकुम्भी की भस्म को सरसों के तेल में मिलाकर लेप करने से पुराने से पुराने टॉन्सिल की सूजन समाप्त हो जाती है।
3-सूखे अंजीर को पानी में उबालकर अच्छी तरह मसल लें फिर इसका लेप करें,इससे गले के भीतर की सूजन ठीक रहती है।
4-स्वेत अपराजिता की जड़ को जल में पीसकर प्रतिदिन सुबह पीने से और घी के साथ रोटी खाने से घण्टी की सूजन दूर होती है।
5-सरसों,सहिजन के बीज,सन के बीज,अलसी,जौ तथा मूली के बीज सभी को समभाग में लेकर पीसकर टॉन्सिल पर लेप करने से उसका शमन होता है।
6-केले के छिलके को निकालकर उसको गले के ऊपर बाँधने से लाभ होता है।
टॉन्सिल रोग में जौ,मूंग एवम् परवल आदि तथा कटु व अन्य रूक्ष पदार्थों का सेवन करना चाहिए।
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