Treatment of Dysentery ? पेचिश का इलाज कैसे करतें हैं ? Pechish ka ilaj kaise karte hai in hindi on blogger on google
पेचिश बड़ी आंत का रोग है। इस रोग में पेट में ऐठन के साथ बार-बार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में चिपचिपा या रक्तयुक्त शीघ्र युक्त शौच होता है। बार-बार शौच के कारण आँतों में सूजन आ जाती है।
जब तक आँतों में सूजन रहती है,तब तक सफेद आंव में घाव का खून भी शामिल होकर लाल आँव आने लगती है,इसे खूनी पेचिश कहतें हैं।
कारण-दस्त पैदा करने वाले जो कारण हैं,उन्हीं कारणों से पेचिश भी होती है।
विरुद्ध भोजन करना,न खाने योग्य भोजन या हानिकारक संयोग वाले भोज्य पदार्थो को खाना,एक बार थोड़े समय बाद फिर खाना,अधिक सूखे,अधिक गर्म,अति पतले और अधिक ठंडे पदार्थों के सेवन से पेचिश होने लगती है।
अजीर्ण भी पेचिश रोग होता है।
लक्षण-पहले पतली दस्त शुरू होती है,जो बाद में पेचिश में बदल जाती है। पेट में अकस्मात मरोड़ और दर्द उठता है और बार-बार मल त्यागने की इच्छा होती है। बहुत जोर लगाने पर भी थोडा सा मल निकलता है। जिसमे की कफ की मात्रा अधिक होती है।
मल में सड़ी बदबू आती है।
दस्त दिन-रात भर में 4-5 से 25-30 बार तक या फिर अधिक आ सकतें हैं।
नुश्खे-1-सुखाये हुए संतरे के छिलके और सूखे हुए मुनक्के के बीज समान मात्रा में घोटकर 4 दिन लगातार लेने से आँव बन्द हो जातें हैं।
2-ताजे छाछ में बेल का गूदा मिलाकर पीने से रक्तातिसार (खूनी पेचिश) का शमन होता है।
3-गाय का दूध और पानी समभाग में लेकर उबालें,जब पानी जल जाये और केवल दूध रह जाये,तो उसे उतारकर कुनकुना ही पियें। इस प्रकार दिन तीन बार पीने से पेचिश मिटती है।
4-2-4 ग्राम सोंठ का चूर्ण गर्म पानी के साथ लेने से अथवा सोंठ का क्वाथ बनाकर उसमें 1 चम्मच एरंड का तेल डालकर पीने से पेचिश रोग दूर होता है।
5-पके नींबू को गर्म कर उसका रस निकालिये,इसमें सेंधा नमक,शक्कर मिलाकर पीने से आँव से छुटकारा मिलता है।
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