कारण-आग की गर्मी,उच्च रक्तचाप,धूप लगने और नाक में कोई संक्रमण पाया जाना इस रोग का कारण है।
लक्षण-इस रोग में रोगी की नाक से रक्तस्त्राव होता है।
नुश्खे-1-नकसीर फूटने पर रोगी के सिर और चेहरे पर ठंडा पानी डालना चाहिए और चेहरे को धोना चाहिए।
2-तीन ग्राम सुहागे को थोड़े से पानी में घोलकर दोनों नथूनों पर लेप करना चाहिए। नकसीर तत्काल बंद हो जायेगी।
3-बीस ग्राम मुल्तानी मिट्टी को पीसकर रात्रि में मिट्टी के बर्तन में 250 ग्राम पानी में भिगोकर रख दें। प्रातः पानी को निथारकर रोगी को पिलायें दो-तीन दिन में ही पुराने से पुराना रोग सदा के लिए समूल नष्ट हो जायेगा। बच्चों को इस पानी में बताशा या मिश्री मिलाकर पिलायें।
4-नदी के समान बहती हुई नकसीर इससे तत्क्षण बंद हो जाती है।अगर इस पानी में नीचे बैठी मुल्तानी मिट्टी को लेप की तरह नाक तथा मष्तिष्क पर 5 मिनट के लिए लगायें तो और भी अधिक लाभ होता है।
5-इस रोग के उपचार के लिए दूर्वा (दूब) बहुत अच्छी औषधि है। यह यह एक प्रकार की घास है। इस घास का रस निकालकर एक-एक नथुने में 10-10 बूंदे डालकर ऊपर की ओर जोर से खींचना चाहिए।इससे लाभ होता है।
नोट-अंगूर,सफेद पेठा,मूँग की दाल का सूप,पुराने चावल,अनार,मक्खन,गाय का दूध और मांस का सूप रोगी को दिए जा सकतें हैं। परन्तू कोई भी गर्म और मसालेदार पदार्थ रोगी को खाने के लिए नहीं दिए जाने चाहिए।
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