1,4,7,8 व 12 वें स्थानों में मंगल होने से मंगली कहतें हैं।
वर की कुंडली में मंगल हो अर्थात वर मंगली हो तो स्त्री अर्थात वधू को हानि होती है।
तथापि यदि वधू यानि स्त्री की कुंडली में मंगल इन स्थानों पर हो तो अर्थात वधू मंगली हो तो वर को हानि होती है।
और यदि दोनों की कुण्डलियों में मंगल दोष हो तो कोई फर्क नहीं पड़ता है।
उसी प्रकार इन स्थानों में शनि,राहु,केतु और सूर्य का भी विचार किया जाता है। यह सब पाप ग्रह मंगल के परिहार हैं।
चंद्र कुंडली से भी इन स्थानों में मंगल आदि का विचार किया जाता है।
दोस्तों आपने पतंजलि के उत्पादों के बारें में तो बहुत ही सुना व देखा होगा आइये आज हम जानतें हैं कि ये है क्या- पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट पतंजलि योगपीठ भारत का सबसे बड़ा योग शिक्षा संस्थान है। इसकी स्थापना स्वामी रामदेव द्वारा योग का अधिकाधिक प्रचार करने एवं इसे सर्वसुलभ बनाने के उद्देश्य से की गयी थी। यह हरिद्वार में स्थित है। आचार्य बालकृष्ण इसके महासचिव हैं। मुख्य कार्य दिव्य योग साधना हिन्दी, अंग्रेजी सहित देश की प्रमुख भाषाओं में योग, आयुर्वेद, संस्कृति, संस्कार व भजनों पर आधारित ऑडियो-वीडियो सामग्री जैसी डी.वी.डी., वी.सी.डी., एम.पी.53 तथा कैसटों के निर्माण व वितरण आदि का प्रबन्ध दिव्य योग साधना द्वारा गाये गये भजनों सहित उनके योग व आयुर्वेद आधारित विषयों पर सौ से भी अधिक डी.वी.डी., वी.सी.डी. व ऑडियो कैसेट का निर्माणादि का प्रबन्धन दिव्य योग साधना द्वारा किया जा चुका है, जिसमें स्वामी जी महाराज द्वारा विभिन्न रोगों के लिये बताये जाने वाले योग-उपचार तथा उनके भजनों पर आधारित भक्ति गीतांजलि व राष्ट्र वंदना की सी.डी. प्रमुख है। योग संदेश योग, आयुर्वेद, संस्कृति, संस्कार व अध्यात्म ...
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