यह एक दर्दनाक,गोल आकार,रोमकूप का शोथ है। एक प्रकार के कीटाणु रोमकूपो अथवा स्वेद-ग्रंथियों के मुख में संक्रमण पहुंचाकर छोटे-छोटे फोड़े उत्प्नन करतें हैं अथवा यूं ही बाल उखड़ जाने पर उस स्थान पर छोटी-छोटी फुंसियाँ निकल आतीं हैं।
कारण-यह रोग उन लोगों को अधिक होता है जो मीठा अधिक खाते हैं,बाल तोड़ने तथा कांटा चुभने आदि के कारण भी यह हो सकता है। जो बच्चे गंदे पानी में अधिक खेलतें हैं। उनमें भी यह रोग अधिक होता है।
लक्षण-रोएँ के मध्य भाग में पीडायुक्त लाल सूजन होती है। कई बार ये फुंसियाँ बिना पके ही बैठ जातीं हैं और अनेक बार पक कर कड़ी हो जातीं हैं,जो पीब के साथ बाहर निकल जाती हैं। फोड़े की तरह इसमें पहले जलन होती है,फिर पीब उत्प्नन होती है। फुन्सी के भीतरी अंश को जो बीच में रहता है,उसे खील कहतें हैं।
नुश्खे-1-कनेर की जड़ की छाल और लौकी 10-10 ग्राम दूध में पीसकर लेप करने से बालों का टूटना रुक जाता है।
2-यह विकार न होते हुए भी भयानक रोग बन जाता है। इसमें सूजन,पकाव और जहर बन जाने के पूरे आसार होतें हैं। पीपल की कोपलों और तुलसी दल एक साथ पीसकर बालतोड़ पर लेप करने से समस्त विकार शांत हो जातें हैं।
3-पत्थरचूर को बालतोड़ पर लगाने से तुरन्त लाभ होता है।
4-सहिजन की छाल घिसकर लगाने से भी लाभ होता है।
5-प्याज को उबालकर उसकी पुल्टिस बाँधने से भी बालतोड़ पककर फूट जाता है।
6-कंदरू के पत्तों का रस अथवा पत्तों की पुल्टिस बनाकर बाँधने से बालतोड़ की वेदना शांत होती है।
7-गेहूँ के आटे की पुल्टिस बनाकर बालतोड़ पर बाँधने से वह ठीक हो जाता है।
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