सुबह दाँत साफ़ करके मुँह में पानी भरकर मुँह फुला लें। इसके बाद आँखों पर ठंडे जल के छीटें मारें। प्रतिदिन इस प्रकार दिन में तीन बार प्रातः दोपहर तथा सायंकाल ठंडे जल से मुख भरकर मुख फुलाकर ठंडे जल से ही आँखों पर हल्के छीटें या छपके मारने से नेत्रों में ताजगी का अनुभव होता है।
विशेष-1-ध्यान रहे कि मुँख का पानी गर्म न होने पावे,गर्म होने पर पानी बदल लें।
2-मुँख से पानी निकालते समय भी पूरे जोर से मुँह फुलाते हुए वेग से पानी छोड़ने से लाभ होता है। आँखों के आस-पास झुर्रियाँ नहीं पड़ती हैं।
3-पानी अत्याधिक शीतल न हो।
4-प्रातः मुँह में पानी अच्छी तरह भरकर त्रिफला जल से आँखो पर छीटें देने से नेत्र-ज्योति मन्द नहीं होती है।
5-त्रिफला जल बनाने के लिए 25 ग्राम त्रिफला (समान मात्रा में लेकर मोटी कुटी हुई) 500 ग्राम जल में शाम के समय किसी मिट्टी या सीसे के पात्र में भिगों दें। प्रातः उस जल को ऊपर से निथारकर बारीक स्वच्छ कपड़े से छानकर उस जल से नित्य नेत्रों को धोयें। उससे नेत्रों के सब विकार नष्ट होकर आँखों की ज्योति बढ़ती है तथा हम नेत्र विकारों से बचे रहतें हैं।
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