इस विकार में बच्चे का मूत्र नींद में बिना पता चले ही निकल जाता है। रात में की बार मूत चुकने के बाद भी बच्चे को पता नहीं चलता है। उत्तेजना के कारण बड़ी आयु वालों में भी ऐसा होता है। ऐसे में डाँटना फटकारना उचित नहीं है। इसके इलाज के निम्न नुश्खे बहुत कारगर हैं-
1-बिस्तर पर पेशाब करने वाले बच्चों को नियमित दो अखरोट और 10-12 किशमिश खिलाने से यह आदत छूट जाती है।
2-बच्चा यदि बिस्तर पर पेशाब करने लगे तो उसे प्रतिदिन छुहारा खिलायें और यदि वह खाने लायक नहीं है। तो उसे छुहारा पीसकर चटायें।
3-सोने के पहले बच्चे के पैरों को कुनकुने पानी से पोछें इससे उनमे यह आदत छूट जायेगी।
4-बच्चों को सोते समय एक छोटा चम्मच शहद चटायें। ऐसा 15-20 दिन नियमित करें। इससे उनमें यह आदत छूट जायेगी।
5-उन्हें प्यार से समझना चाहिए और रात को भोजन यथासम्भव शीघ्र करा देना चाहिए। रात में उन्हें द्रव पदार्थ कम दें या बिल्कुल न दें।
6-रात को सोने से पहले तथा आधी रात को पेशाब करा देना चाहिए।
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