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तिलक क्यों लगतें हैं ?

शास्त्रों के अनुसार यदि ब्राह्मण तिलक नहीं लगता तो उसे चाण्डाल समझना चाहिए । तिलक धारण करना धार्मिक कार्य माना गया है। तिलक,त्रिपुंड,टीका अथवा बिन्दिया आदि का सम्बन्ध मस्तिष्क से होता है । मनुष्य की दोनों भौहों के बीच जिस स्थान पर तिलक लगते हैं । वहाँ पर आज्ञा चक्र स्थित होता है । इस चक्र पर ध्यान केन्द्रित करने पर साधक का मन पूर्ण शक्ति सम्पन्न हो जाता है । इसे चेतना केंद्र भी कहतें हैं अर्थात समस्त ज्ञान एवम् चेतना का संचालन इसी स्थान से होता है । आज्ञा चक्र ही तृतीय नेत्र है । इसे ही दिव्य नेत्र भी कहते हैं। तिलक लगाने से आज्ञा चक्र जाग्रत होता है । जिसकी तुलना रडार टेलिस्कोप आदि से की जा सकती है । इसके आलावा तिलक सम्मान-सूचक भी है । तिलक लगाने से साधुता,सज्जनता एवम् धार्मिकता का आभास होता है ।

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