विधि-वज्रासन में बैठ जाइए। फिर भुजाओं और कोहनियों के सहारे पीछे की तरफ झुकते जाइए जब तक कि सिर सतह से न लग जाये। कमर पूर्ण रूप से धनुषाकार रहेगी। अभ्यास क्रम में इस बात का ध्यान रखें कि घुटने सतह पर सटे रहें। हाथों को जाँघो पर रख लीजिये। इसके बाद आँखे बंद करके पूरे शरीर को ढीला छोड़ दीजिये।
श्वास-अभ्यास के दौरान श्वास को सामान्य रखें। पेट के रोगों को दूर करने के लिए आमाशय को फैलाते व संकुचित करते हुए श्वास धीमा और गहरा होना चाहिए।
समय-शारीरिक लाभ के लिए कुछ मिनट तक अभ्यास काफी है।जो आध्यात्मिक लाभ के लिए इस आसान का अभ्यास करना चाहते हैं,उन्हें इसे लम्बे समय तक करना चाहिए।
सावधानी-घुटनों को हठपूर्वक सतह से स्पर्श कराने ले लिए जाँघो और घुटनों की मासपेशियों व संधिबन्धनो में अनावश्यक रूप से तनाव उत्प्नन न किया जाए अपने शरीर की क्षमता एवम् संभावनाओ को देखते हुए अंतिम स्थिति पर धीरे-धीरे पहुचना चाहिए।
क्रम-इसका अभ्यास आगे झुककर किये जाने वाले आसनों के बाद में हो।
सीमाएं-रीढ़ के निचले भाग के रोग जैसे हड्डी की टीबी से पीड़ित रोगियों को किसी योग शिक्षक से पूछे बिना इस आसान का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
लाभ-आमाशय के रोगों जैसे कब्ज ले लिए यह आसान बहुत अच्छा है क्योंकि यह आंतो को शक्ति के साथ फैलता व संकुचित करता है। पूरे शरीर को मस्तिष्क से जोड़ने वाले रीढ़ के मुख्य स्नायुओं में दबाव सामान्य रखने के लिए यह आसान बड़ा ही लाभकारी है।
दोस्तों आपने पतंजलि के उत्पादों के बारें में तो बहुत ही सुना व देखा होगा आइये आज हम जानतें हैं कि ये है क्या- पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट पतंजलि योगपीठ भारत का सबसे बड़ा योग शिक्षा संस्थान है। इसकी स्थापना स्वामी रामदेव द्वारा योग का अधिकाधिक प्रचार करने एवं इसे सर्वसुलभ बनाने के उद्देश्य से की गयी थी। यह हरिद्वार में स्थित है। आचार्य बालकृष्ण इसके महासचिव हैं। मुख्य कार्य दिव्य योग साधना हिन्दी, अंग्रेजी सहित देश की प्रमुख भाषाओं में योग, आयुर्वेद, संस्कृति, संस्कार व भजनों पर आधारित ऑडियो-वीडियो सामग्री जैसी डी.वी.डी., वी.सी.डी., एम.पी.53 तथा कैसटों के निर्माण व वितरण आदि का प्रबन्ध दिव्य योग साधना द्वारा गाये गये भजनों सहित उनके योग व आयुर्वेद आधारित विषयों पर सौ से भी अधिक डी.वी.डी., वी.सी.डी. व ऑडियो कैसेट का निर्माणादि का प्रबन्धन दिव्य योग साधना द्वारा किया जा चुका है, जिसमें स्वामी जी महाराज द्वारा विभिन्न रोगों के लिये बताये जाने वाले योग-उपचार तथा उनके भजनों पर आधारित भक्ति गीतांजलि व राष्ट्र वंदना की सी.डी. प्रमुख है। योग संदेश योग, आयुर्वेद, संस्कृति, संस्कार व अध्यात्म ...
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