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अक्सर पूजा-पाठ से समय ब्राह्मण पूजा सुनने वाले व्यक्ति के हाँथो में जल व कुश रखकर संकल्प कराते हैं । यह संकल्प क्या है ?

किसी कार्य के लिए शपथ ग्रहण करना,दृढ़ प्रतिज्ञ होना ही संकल्प कहलाता है । पूर्व में वामन भगवान असुरराज बलि को संकल्प उठाने के लिए कहते हैं । राजा बलि के संकल्प के उपरान्त वामन भगवान ने तीन डग भूमि की याचना की थी । आत्म विश्वास और विनम्रता पूर्वक शुभ कार्य करने को प्रेरित अनुष्ठान का नाम संकल्प है ।

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